Indian railways step forward for labours.




 मिल गए पहिए उन कदमों को,
अब शायद जा के उस भी अपनी मिट्टी मिले।

जिंदगी जो धोखे पर उतर आई है
शायद उसे भी मां की गोद मिले।

यूं तो परिवार की बेबसी का सहारा बन वो चौखट से बाहर आया था,
घर के चूल्हे की ताप... आज बस अपने बच्चो के निवाले कि उम्मीद में तड़के उठे।

मंदी के इस दौर में मजबूती भी मजबूर हुई
लेकिन उम्मीदों की इस कड़ी में ,
आज जा के वो बचपन की गली से तो मिले।।

--- नारायणी




मेरे देश का मज़दूर...
मजबूत है,
मजबूर नहीं।

It is glad to know that indian railways has taken a strong initiative for the migration of labour to their home state. 
A huge congratulations to people suffering from this issue and respect to the government.

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