Original writings
कुछ गुफ्तगू जो उस रोज़ रह गई थी,
वो अभी बाकी है...
सांसे जो धड़कनों से रुसवा हुई थी,
सुलह बाकी है...
महफ़िल की रौनक भी जिसके नाम की थी,
जाम का प्याला हाथ में लिए वो प्यासा...
.....शायद एक साकी है।।
--- नारायणी
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