Narayani ki kalam se

 गहरी तो वो आंखे हैं,

जिनमें एक जहां दिखता हैं।


प्यास की तड़प 

तो सिर्फ पानी चाहें...

वर्ना एक दरिया हैं,

जो सिर के ऊपर भी तो बहता है।


--- नारायणी

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