हर पल दुःशासन का चीर हरण सहू
फिर भी महाभारत की वजह.जानी जाऊ मैं।
छोटी उम्र से दो कुनबों का मान ढो रही,
थोडा डगमगा जाउ, तो कुल नाशिनी मैं।
मेरे कदमो मे जन्नत मिले,
पर जीवन भर नरक सहु मैं।
जवाब के इंतजार में मरती जा रही हु,
नहीं मिला, तो इसकी भी अपराधी मैं!!!
--- नारायणी
Good job
ReplyDelete👏👏👏👏
ReplyDelete