अगर यूं...
दूसरों का आशियाना ना उजाड़ा होता,
तो शायद आज यू
....खुद अपने घरों में कैद ना होते।।
काश के सदियों तक...
इस धरा को आग में ना झौका होता,
तो शायद आज यूं
.... हमारा चूल्हा ताप के बिसर खाली ना होता।।
--- नारायणी
दूसरों का आशियाना ना उजाड़ा होता,
तो शायद आज यू
....खुद अपने घरों में कैद ना होते।।
काश के सदियों तक...
इस धरा को आग में ना झौका होता,
तो शायद आज यूं
.... हमारा चूल्हा ताप के बिसर खाली ना होता।।
--- नारायणी
is trh k jhtke jroori h insano ko yaad dilane k liye ki dhrti surf h ki nhi h
ReplyDeletesirf*
ReplyDeleteGood lines.
ReplyDelete👏👏👏
ReplyDeleteThnxx
DeleteGood efforts
ReplyDeleteGood one
ReplyDelete