पूरी किताब ना सही,
कोई एक किस्सा तो मुझसे होगा ही...
किसी की मोहब्बत न तो दोस्ती में,
मेरा कुछ तो हिस्सा होगा ही...
मेरा कुछ तो हिस्सा होगा ही...
चांद भले ना सही,
मेरे हिस्से में कुछ आसमान तो होगा ही।
बंद अलमारियों में छिपी कोई तस्वीर ना सही,
पर आज भी उन पुरानी किताबों मे तो मेरा दिया फूल होगा ही...
पर आज भी उन पुरानी किताबों मे तो मेरा दिया फूल होगा ही...
सावन में भीगी साथ बारिशों को नहीं,
शायद तेज़ धूप में मेरे साए को याद किया होगा ही...
शायद तेज़ धूप में मेरे साए को याद किया होगा ही...
चांद भले ना सही,
मेरे हिस्से में कुछ आसमान तो होगा ही।
दुनिया या दरिया के किनारे तो नहीं,
पर उन तंग गलियों से गुजरते वक्त__
पर उन तंग गलियों से गुजरते वक्त__
याद तुमने भी कभी तो किया होगा ही...
सुहानी सुबह और रंगीन शामो में ना सही,
लेकिन अंधेरी अकेली रातों में__
लेकिन अंधेरी अकेली रातों में__
मेरा कभी एक बार तो नाम लिया होगा ही...
चांद भले ना सही,
मेरे हिस्से में कुछ आसमान तो होगा ही।
--- नारायणी
kisi or me hon na hon...in shabdon me to tum ho hi....
ReplyDeleteus insaan ki yaadon me nhi to kisi k hothon se jhankti tumari kavita me sahi... ;)
Beautiful words.
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